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पारिजात है औषधीय गुणों से भरपूर, जानिये-हरसिंगार के फायदे और नुकसान

हरसिंगार के फायदे, उपयोग और नुकसान: आपने पारिजात का नाम तो सुना ही होगा। इसको रात चमेली और औषधि भाषा में हरसिंगार के रूप में जाना जाता है। हरसिंगार को आयुर्वेद के क्षेत्र में बहुत अधिक महत्ता दी गई है।

यह पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर है, जिसका उपयोग बहुत सारे बीमारियों में किया जाता है। जैसे की-पाचन को ठीक रखने में, लीवर की बीमारी में, पेट दर्द, साटिका की बीमारी इत्यादि रोगों में किया जाता है।

हरसिंगार का वृक्ष

हरसिंगार का वृक्ष काफी झड़ीदार होता है। और इसके सफेद रंग के फूल निकलते हैं। हरसिंगार के फूल अक्सर रात में ही खिलते हैं और सुबह होते ही झड़ जाते हैं। जिसके कारण हरसिंगार के वृक्ष को रात-रानी या रात-चमेली के नाम से भी जाना जाता है।

हरसिंगार के फूल के अलावा इसके पत्ते और छाल दोनों का भी उपयोग बीमारियों के इलाज में किया जाता है। क्योंकि इसमें भी अनेक प्रकार के प्राकृतिक आयुर्वेदिक गुण पाए जाते हैं।

लेकिन हरसिंगार का अत्यधिक इस्तेमाल करना भी व्यक्ति के स्वस्थ्य के लिए हानिकारक होता है। क्योंकि काफी लोगों को ये नहीं पता होता है की हरसिंगार का इस्तेमाल किन-किन बीमारियों में, किस प्रकार से उपयोग करना चाहिए।

इसलिए इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको हरसिंगार के फायदे, उपयोग और नुकसान के बारे में अच्छे से जानकारी दूँगी। ताकि आप इसका ठीक तरीके से इस्तेमाल करें, जिससे आपको पारिजात का भरपूर लाभ मिल सके। तो चलिए हरसिंगार के फायदे, उपयोग और नुकसान के बारे में अच्छे से जानते हैं।

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हरसिंगार (पारिजात) से सम्बंधित तथ्य

हरसिंगार और पारिजात के पौधों के बारे में काफी लोगों उलझन रहती है की, ये दोनों पौधे अलग-अलग होते हैं या नहीं। कुछ लोगों का मानना है की ये दोनों एक ही होते हैं। और काफी लोग कहते हैं की ये दोनों अलग-अलग होते हैं।

लेकिन मैं आपको बता दूँ की हरसिंगार और पारिजात दोनों एक ही पौधे के अलग-अलग नाम है। यह आम भाषा में पारिजात के नाम से जाना जाता है, और इसके अंदर औषधीय गुण होने के कारण इसको हरसिंगार के नाम से जाना जाता है। कई लोग इसे रात-चमेली (Night Jasmine) भी कहते हैं, क्योंकि इसके फूल रात में खिलते हैं, और सुबह होते ही झड़ जाते हैं।

इसके पत्ते, छाल और फूल सबका उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसके छाल को निकाल कर इसका चूर्ण बनाकर इसका इस्तेमाल किया जाता है। गठियाँ और साटिका को ठीक करने के लिए इसके फूल का इस्तेमाल किया जाता है। हरसिंगार का फूल पूरे साल में केवल जून के महीने में खिलता है।

पारिजात से जुड़ी बहुत सारी मान्यताएं भी तो चलिए इसके बारे में जानते हैं।

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पारिजात से जुड़ी मान्यतायें

पारिजात हिन्दू मान्यताओं में यह बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हमारे शास्त्रों में इसे अत्यंत शुभ और पवित्र वृक्ष की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए पारिजात से जुड़ी बहुत सारी कथाएं और मान्यतायें भी हैं।

#1. कहा जाता है की पारिजात का वृक्ष रात के समय में रोता है। इसके पीछे की एक कहानी बहुत प्रचलित है। कहा जाता है की, पारिजात नाम की राजकुमारी को सूर्य देवता से प्रेम हो गया था।

बहुत तप करके राजकुमारी सूर्य देवता को मनाने की कोशिश करती हैं, लेकिन सूर्य देवता पारिजात के प्रेम प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं। तब क्रोध में आकर राजकुमारी आत्महत्या कर लेती है। और उसकी कब्र पर जो पहला पौधा उगा, वो पारिजात के नाम से जाना जाता है। यही कारण है की यह पौधा रात के समय में रोता है।

#2. मान्यता है की पारिजात का वृक्ष धन की देवी लक्ष्मी जी को बहुत अधिक प्रिय है। इसलिए पारिजात लक्ष्मी जी को चढ़ाया जाता है।

हरसिंगार का पत्ता – 10 फायदे

हरसिंगार के पत्तों के अनेकों फायदे हैं, इसका उपयोग कई सारी बीमारियों में किया जाता है। तो चलिए हरसिंगार के पत्तों – 10 फायदे क्या है।

1. पाचन

आयुर्वेद के अनुसार हरसिंगार का इस्तेमाल पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में किया जाता है। क्योंकि इसके अंदर एंटी स्पस्मोडिक गुण पायें जाते हैं इसलिए पारिजात के पत्तों का रस निकालकर पिया जाता है, जिससे पेट में भोजन को आसानी से पचाने में मदद मिलती है।

2. अर्थराइटिस (गठिया)

हरसिंगार में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो गठिया रोग को ठीक करने में काफी मददगार साबित होते हैं। इसलिए पारिजात के फूलों का रस निकालकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

3. एंटीबैक्टीरियल

हरसिंगार एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जिसके कारण बैक्टीरियल संक्रमण वाले रोग जैसे-खांसी, जुखाम, बुखार, आदि बीमारी इससे जल्दी ठीक हो जाते हैं।

4.हृदय

बहुत लोगों को मोटापे और मधुमेह के कारण हृदय से संबंधित बीमारी हो जाती है। पारिजात की जड़ों के रस का इस्तेमाल शरीर के रक्तचाप और मधुमेह को कम करने में बहुत उपयोगी होता है।

5.पाइल्स

गलत खान-पान की वजह से पाइल्स की समस्या भी दिन-प्रतिदिन लोगों में बढ़ती जा रही है। हरसिंगार में लैक्सेटिव और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं, जिससे इसके प्रयोग से बवासीर के सूजन से छुटकारा मिलता है।

6.ब्लड डिटॉक्सीफिकेशन

हरसिंगार का इस्तेमाल रक्त को साफ करने के लिए लिए भी बहुत उपयोगी होता है। हरसिंगार में हेपाटो प्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं। जो लीवर के संक्रमण को रोकता है। यह लीवर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है।

7.डेंगू और चिकनगुनिया

हरसिंगार के अंदर एंटीवायरल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। जो डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारी को ठीक करने में बहुत अधिक मदद करता है। इसके अलावा वो जोड़ों के दर्द में भी काफी अधिक मदद करता है।

8.दाद-खुजली

हरसिंगार मे किटाणु नाशक गुण होते हैं इसलिए हरसिंगार के अर्क को दाद-खाज जैसी जगहों पर लगाने से वो जल्द से जल्द ठीक हो जाते है।

9.साइटिका

हरसिंगार के फूल, पत्तों और इसके चूर्ण का इस्तेमाल साइटिका के दर्द, घुटनों के दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके पत्तों को गरम करके साइटिका वालों स्थान पर लगाकर सेकने से, इस बीमारी में बहुत राहत मिलता है।

10. अस्थमा

हरसिंगार के पत्ते एंटी-अस्थमाटिक और एंटी-एलर्जीक गुणों से भरपूर होते हैं। इसके अतरिक्त इसकी पत्तियां नाईट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन को बढ़ाकर नाक की नली में जमे कॉफ को दूर करने और आराम से साँस लेने में मदद करती हैं।

हरसिंगार के परहेज करने के कारण (पारिजात के नुकसान)

हरसिंगार के फायदे तो मैंने आपको बताया जिसको आप भली-भाँति समझ गए होंगे। लेकिन इसके फायदे होने के साथ-साथ हरसिंगार के नुकसान भी होते हैं। यदि आप इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करते हैं तो हरसिंगार से आपको नुकसान भी बहुत सकते हैं। तो चलिए जान लेते हैं, की इसके अत्यधिक सेवन से शरीर को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं।

  • हरसिंगार कॉफ और अस्थमा जैसी बीमारियों में बहुत उपयोगी होता है, लेकिन बहुत से हरसिंगार की तासीर ठंडी होने के कारण इसका अत्यधिक सेवन कॉफ को बढ़ाने और खांसी को और उत्तेजित कर देता है। इसलिए अस्थमा जैसी बीमारी में इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए हरसिंगार का सेवन बहुत हानिकारक होता है। इसलिए गर्भवती महिलायें इसका सेवन बिल्कुल भी ना करें।
  • कई लोगों का शरीर काफी संवेदनशील होता है, इसलिए यदि आपका भी शरीर संवेदनशील है तो आपको इसके सेवन नहीं करना चाहिए। यदि सेवन करना है तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

हरसिंगार सम्बंधित प्रश्न 

हरसिंगार के पत्तों को कैसे खाएं? 

हरसिंगार के फायदे : हरसिंगार के पत्ते बहुत से रोगों में उपयोगी होते हैं। इसलिए हरसिंगार के पत्तों को तोड़कर इसको धूप में सूखा लें। और इसका चूर्ण बना लें। आप रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं। यह शरीर के संक्रमण से छुटकारा देने में काफी अधिक मदद करता है। हरसिंगार जोड़ों के दर्द में भी बहुत अधिक राहत देता है।

हरसिंगार का प्रयोग कैसे करें?

हरसिंगार का निम्नलिखित तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

1. हरसिंगार के पत्तों को पीसकर इसको जोड़ों के दर्द में, इसके लेप को गरम करके लगा सकते हैं।
2. इसके पत्तों को सुखाकर इसका खाली पेट सेवन कर सकते हैं।
3. इसके पत्तों का काढ़ा बना कर आप दिन में 2 बार सेवन कर सकते हैं।
4. हरसिंगार के फूलों को पीसकर इसका लेप जोड़ों के दर्द में पर लगाने से बहुत आराम मिलता है।

पारिजात और हरसिंगार में क्या अंतर है? 

पारिजात और हरसिंगार में बहुत लोगों को उलझन रहती है की ये दोनों एक हैं या अलग-अलग हैं। लेकिन मैं आपको बता दूँ की पारिजात को ही आयुर्वेदिक भाषा में हरसिंगार कहते हैं। इसके अलावा पारिजात का फूल रात में खिलता है और सुबह झड़ जाता है, जिसके कारण पारिजात को रात चमेली भी कहा जाता है।

पारिजात के क्या फायदे हैं?

पारिजात के बहुत ही अधिक फायदे हैं। पारिजात का वृक्ष सिर्फ एक धार्मिक वृक्ष ही नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं में भी किया जाता है। हरसिंगार का इस्तेमाल कई सारी बीमारियों के इलाज में किया जाता है। जैसे आपके घुटनों में दर्द, और जोड़ों में दर्द, बुखार-खांसी और अस्थमा जैसी बीमारियों के इलाज में बहुत अधिक उपयोगी होता है।

 निष्कर्ष 

हरसिंगार एक धार्मिक पौधा होने के साथ-साथ एक आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी प्रयोग होता है। पारिजात को दैवीय वृक्ष भी माना जाता है। इसका फूल बहुत ही पवित्र माना जाता है।

पारिजात को लेकर बहुत उलझन होता है, क्योंकि कई लोगों का मानना है की पारिजात और हरसिंगार दोनों अलग-अलग होते हैं। लेकिन पारिजात और हरसिंगार दोनों अलग-अलग नहीं होते हैं।

हरसिंगार के फायदे बहुत ही अधिक है, इसके प्रयोग से जोड़ों के दर्द और खांसी, बुखार आदि में बहुत राहत मिलता है। लेकिन आवश्यकता से अधिक इसका शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए मैंने इस पोस्ट के माध्यम से मैंने बताया है की आप किस प्रकार से पारिजात का सेवन कर सकते हैं, जिससे आपको इसका लाभ मिल सकें।

यदि आप पारिजात का सेवन करते हैं, तो आप मेरे साथ अपना अनुभव जरूर बताएं। इसके अलावा यदि आपको इस पोस्ट से संबंधित कोई सवाल हो या आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो कमेन्ट करके जरूर बताएं।

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